'द एनिमल स्कूल' (जानवरों का विद्यालय)-विश्लेषण के लिए एक कहानी

 एक बार जानवरों ने फैसला किया कि उन्हें 'नयी दुनिया की समस्याओं को संबोधित करने के लिए कुछ अलग करना होगा, इसलिए उन्होंने एक विद्यालय तैयार किया। उन्होंने दौड़, चढ़ाई, तैराकी और उड़ान से जुड़ी एक गतिविधि पाठ्यचर्या को अपनाया।

पाठ्यचर्या संचालन आसान बनाने के लिए सभी जानवरों को प्रत्येक विषय लेना आवश्यक बनाया गया।


 बत्तख तैराकी में उत्कृष्ट थी। वास्तव में, अपने प्रशिक्षण से भी बेहतर थी, लेकिन उड़ान में उसे केवल पास होने लायक ग्रेड मिले और वह दौड़ने में बहुत कमजोर थी। 

चूँकि दौड़ने में वह बेहद कमज़ोर थी, इसलिए उसे दौड़ने का अभ्यास करने के लिए विद्यालय के बाद रुकना पड़ा और तुर्की भी छोड़नी पड़ी।

ऐसा तब तक किया गया, जब तक कि तैरने में सहायक उसके जालीदार पैर खराब नहीं हो गए और वह तैराकी में औसत स्तर पर आ गई, लेकिन विद्यालय में औसत स्वीकार्य था। 

इसलिए किसी को भी इस बात की ज़रा-सी भी चिंता नहीं थी, सिवाय बत्तख के खरगोश ने अपनी शुरुआत कक्षा में दौड़ने में अव्वल आने से की, लेकिन तैराकी में उसे इतना सारा काम (अभ्यास एवं पूरक) करना पड़ा कि उसका मानसिक संतुलन जैसे बिगड़ ही गया था।

 गिलहरी चढ़ाई करने में तब तक उत्कृष्ट थी, जब तक कि उसकी रुचि खत्म नहीं हुई, लेकिन फिर उसके शिक्षक ने उसे बार-बार पेड़ से नीचे आने की बजाय केवल जमीन से पेड़ की ओर ही बार-बार जाने के लिए कहा और मामला बिगड़ना शुरू हो गया।

 उसे बहुत मेहनत करने के लिए कहा गया और परिणामस्वरुप उसे चढ़ाई में 'सी' और दौड़ने में 'डी' ग्रेड मिला।


जॉर्ज रिएविस की काल्पनिक कहानी, 'द एनिमल स्कूल' का एक रूपांतरण, जिसे मूल रूप से 1940 में लिखा गया था, जब वह सिनसिनाटी पब्लिक स्कूलों के अधीक्षक थे।


• बाज़ एक समस्या वाला बच्चा था और उसे गंभीरता से अनुशासित किया गया। चढाई की कक्षा में उसने अन्य सभी लोगों को पेड़ से ऊपर पहुंचने में हरा दिया. लेकिन उसे पसंद नहीं किया गया क्योंकि उसने वहाँ तक पहुँचने के लिए अपने तरीके का उपयोग करने पर जोर दिया। • वर्ष के अंत में एक असामान्य ईल जो बेहद अच्छी तरह से तैर सकती थी, थोड़ी चढ़ाई, थोड़ी दौड़-भाग और थोड़ा-बहुत उड़ भी सकती थी, को सबसे अधिक औसत अंक मिले और वह विजेता बनी। प्रेअरी कुत्ते विद्यालय से बाहर ही रहे और प्रशासन से लड़ते रहे क्योंकि खुदाई और बिल बनाने को पाठ्यचर्या में शामिल नहीं किया जा रहा था


कार्य-पत्रिका हेतु विचार साझा करें-

. सभी जानवरों ने एक ही जैसे विषय क्यों लिए? क्या उन सभी को इससे लाभ मिला?

. विद्यालय द्वारा सभी विषयों में औसत होना स्वीकार्य था। क्या यह सभी जानवरों के लिए उपयुक्त था?

आपके विचार में गिलहरी को पेड़ के ऊपर से नीचे की ओर उड़कर क्यों नहीं आने दिया गया? 

• बाज़ को एक समस्या वाले बच्चे के रूप में क्यों देखा गया? आपके विचार में प्रेअरी कुत्ते पाठ्यचर्या में खुदाई करना और बिल बनाना क्यों शामिल करना चाहते थे?


विद्यालयों में भेदभाव, शारीरिक दंड, दुर्व्यवहार या छेड़छाड़/बदमाशी का डर तो नहीं ही होना चाहिए। साथ ही, शिक्षकों को अपने अधिगम कार्यों और शिक्षणशास्त्रीय अभ्यासों की योजना इस तरह से बनाने की ज़रूरत है कि सभी बच्चे, शिक्षा प्रक्रिया में समान रूप से भाग ले सकें।

 कक्षा का माहौल ऐसा होना चाहिए कि हर बच्चा उदासी महसूस करने, ऊबने,डरने या अकेले रहने के बजाय, खुश और तनावमुक्त महसूस करे। सभी बच्चों को समान रूप से दिए गए शिक्षा के मौलिक अधिकार को क्रियान्वित करने के लिए सभी विद्यार्थियो के लिए सुरक्षित और समावेशी वातावरण बनाना महत्वपूर्ण है। 

प्रत्येक बच्चे को अधिकार है कि उसे अपने समुदाय के विद्यालय में प्रवेश के लिए और शिक्षकों एवं साथियों के साथ सम्मानपूर्वक जुड़ाव एवं सम्मिलित होने के लिए सहयोग मिले। 

अध्ययनों से पता चला है कि अलगाव वाली स्कूली शिक्षा की तुलना में समावेश शिक्षा का तरीका कम खर्चीला और शैक्षणिक एवं सामाजिक रूप से अधिक प्रभावी है।

 जब सभी बच्चे, उनकी पृष्ठभूमि या सीखने की जरूरतों पर आधारित भेदभाव के बिना एक साथ शिक्षित होते हैं, तो सभी को लाभ होता है और यही समावेशी शिक्षा की आधारशिला है। 

बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और अधिगम के अवसर प्रदान करने के लिए विद्यालय और शिक्षकों को अत्यधिक मेहनत के साथ अपनी ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए।


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