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विद्यालय नेतृत्व विकास कार्यक्रम का चतुर्थ दीक्षा कोर्स पुनः दीक्षा app पर उपलब्ध, देखें लिंक

 सभी BSA, BEO,SRG, ARP एवं प्रधानाध्यापक/प्रधानाध्यापिका ध्यान दें:- विद्यालय नेतृत्व विकास कार्यक्रम का चतुर्थ दीक्षा कोर्स पुनः दीक्षा app पर उपलब्ध:- उपरोक्त के संदर्भ में चतुर्थ कोर्स अब दीक्षा प्लेटफार्म पर पुनः उपलब्ध है। इस कोर्स से सम्बंधित निम्नलिखित जानकारी है-  1. कोर्स का नाम - अनुदेशात्मक/ निर्देशात्मक नेतृत्व 2. मॉड्यूल- यह कोर्स 5 भाग में विभाजित किया गया है, जिसके अंतर्गत अनुदेशात्मक नेतृत्व का परिचय, अनुदेशात्मक नेतृत्व मूल्यांकन एवं अनुदेशात्मक नेतृत्व के लिए कुछ रणनीतियां सम्मिलित की गयी हैं।  3. कुल समयावधि- कोर्स की कुल अवधि 30 मिनट है। कोर्स के पश्चात दिए गए अंतिम मूल्यांकन प्रश्नों के उत्तर देने पर ही कोर्स पूर्ण माना जायेगा।  4. दीक्षा प्लेटफार्म पर कोर्स  को पूर्ण करने हेतु लिंक-  https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_313253563954642944126756 5. यह कोर्स सभी SRG, ARP,और सभी हेड टीचरों के लिए अनिवार्य है। साथ ही साथ जिन्होनें अप्रैल माह में यह कोर्स पूर्ण कर लिया था उन सभी को  यह कोर्स फिर से नहीं करना हैं। कृपया पाठ्यक्रम 30 जून 2021 से पहले समाप्त करे

विद्यालयी शिक्षा में नयी पहलें, अधिगम के उद्देश्य एवम विद्यालयी शिक्षा के लिए समेकित योजना

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शिक्षा, मानव संसाधन विकास का मूल है जो देश की सामाजिक-आर्थिक बनावट को संतुलित करने में महत्वपूर्ण और सहायक भूमिका निभाती है बेहतर गुणवत्ता का जीवन प्राप्त करने के लिए एवं अच्छा नागरिक बनने के लिए बच्चों का चहुँमुखी विकास जरूरी है।  शिक्षा की एक मजबूत नींव के निर्माण से इसे प्राप्त किया जा सकता है। इस मिशन के अनुसरण में, मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एम.एच.आर.डी.) दो विभागों के माध्यम से काम करता है   स्कूली शिक्षा और साक्षरता   उच्च शिक्षा विभाग  जहाँ विद्यालय शिक्षा और साक्षरता विभाग देश में स्कूली शिक्षा के विकास के लिए जिम्मेदार है, वहीं उच्च शिक्षा विभाग, संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की सबसे बड़ी उच्च शिक्षा व्यवस्था में से एक की देखभाल करता है।  एम.एच.आर.डी. अपने संगठनों जैसे एन.सी.ई.आर.टी, एन.आई.ई.पी.ए. एन.आई.ओ.एस., एन.सी.टी.ई. आदि के साथ मिलकर काम कर रहा है। हालाँकि एम.एच.आर.डी. का दायरा बहुत व्यापक है, यह मॉड्यूल डी.ओ.एस.ई.एल. द्वारा सार्वभौमिक शिक्षा और इसकी गुणवत्ता में सुधार की दिशा में हाल में किए गए प्रयासों पर केंद्रित है। अधिगम के उद्देश्य इस मॉड्यूल के अध्यय

विद्यालय व्यवस्था : शिक्षकों के कौशल, विविधता की स्वीकार्यता और समाधान

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विद्यार्थियों में अंतर की पहचान करने के लिए संवेदनशीलता विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के गुणों और कमजोरियों, योग्यता और रुचि के बारे में जागरूक होना।  • विद्यार्थियों के बीच सामाजिक-सांस्कृतिक, सामाजिक आर्थिक और भौतिक विविधताओं की स्वीकृति—सामाजिक संरचना, पारंपरिक और सांस्कृतिक प्रथाओं, प्राकृतिक आवास, घर तथा पड़ोस में परिवेश को समझना। • मतभेदों की सराहना करना और उन्हें संसाधन के रूप में मानना- अधिगम प्रक्रिया में बच्चों के विविध संदर्भ और ज्ञान का उपयोग करना शिक्षण-अधिगम की विभिन्न जरूरतों को समझने के लिए समानुभूति और कार्य- अधिगम शैलियों पर विचार करना और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देना।  शिक्षार्थियों को विभिन्न विकल्प प्रदान करने के लिए संसाधन जुटाने की क्षमता- आस-पास से कम लागत की सामग्री, कलाकृतियों, अधिगम उपयोगी सहायक स्थानों, मानव संसाधनों और मुद्रित तथा डिजिटल रूप में अनेक संसाधनों को पहचानना एवं व्यवस्थित करना। • प्रौद्योगिकी के उपयोग से अधिगम सहायता करना- विभिन्न एप्लिकेशन का उपयोग। उदाहरण के लिए गूगल आर्ट एंड कल्चर, गूगल स्काई, गूगल अर्थ, विषय विशिष्ट ऐप्स जियोजेब्रा, ट्रक्स ऑफ़