सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

निष्ठा FLN प्रशिक्षण : Module 11,12 (दीक्षा Link)

 *निष्ठा FLN प्रशिक्षण, उत्तर प्रदेश* 

*Module 11 & 12 Launch* 


Start Date : *1 March 2022*    

End Date:    *31 March 2022*


BSA, DIET प्राचार्य, BEO, KRP, SRG, ARP, DIET मेंटर, शिक्षक संकुल, निष्ठा एडमिन/कोऑर्डिनेटर एवं अन्य सभी सदस्य कृपया ध्यान दें:


जैसा की आप अवगत है कि, निष्ठा FLN प्रशिक्षण प्रदेश में 15 October 2021 से  दीक्षा पोर्टल के माध्यम से शुरू किया गया है । 


इसी क्रम मे *Module 11 एवं 12, 1 March 2022 से Live* किये जा रहें हैं, सभी BSA, DIET प्राचार्य, BEO, SRG, KRP, ARP, DIET मेंटर एवं निष्ठा एडमिन/कोऑर्डिनेटर *इस अनिवार्य प्रशिक्षण से सभी प्राथमिक विद्यालयों एवं कंपोज़िट विद्यालयों के कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षकों को जोड़ना सुनिश्चित करें*| 


*प्रशिक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ निम्वत है-* 


 *Module 11 (दीक्षा Link)* :

*https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31348436997064294412994


 *Module 12  (दीक्षा Link)* :

*https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31348437328270950412789


 *Important Note-* 

 *1.* प्रशिक्षण से पहले सभी users अपना दीक्षा ऐप playstore से अनिवार्य रूप से update कर लें ।

 *2.* अपनी दीक्षा प्रोफाइल में district, block, school का चयन कर update कर लें । ( *https://youtu.be/8sHuHUrkBxQ*  वीडियो लिंक का प्रयोग कर प्रोफाइल अपडेट करने की प्रक्रिया को समझ सकते हैं )

 *3.* मोड्यूल 11 एवं 12 का डैशबोर्ड 6 March 2022 से Live किया जाएगा।


 *Dashboard Link-* *https://rebrand.ly/upnishthadashboard*


 *Nishtha FLN प्रशिक्षण क्या है और इसको कैसे करें*:

 *Video Link:*  *https://youtu.be/6dz6izD0R1Y


 *आज्ञा से,* 

 *महानिदेशक* 

 *स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश।*

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गणित सीखने-सिखाने का सही क्रम क्या होना चाहिए?

बच्चों के पास स्कूल आने से पहले गणित से सम्बन्धित अनेक अनुभव पास होते हैं बच्चों के तमाम खेल ऐसे जिनमें वे सैंकड़े से लेकर हजार तक का हिसाब रखते हैं। वे अपने खेलों में चीजों का बराबर बँटवारा कर लेते हैं।  अपनी चीजों का हिसाब रखते हैं। छोटा-बड़ा, कम-ज्यादा, आगे-पीछे, उपर-नीचे, समूह बनाना, तुलना करना, गणना करना, मुद्रा की पहचान, दूरी का अनुमान, घटना-बढ़ना जैसी तमाम अवधारणाओं से बच्चे परिचित होते हैं।  हम बच्चों को प्रतीक ही सिखाते हैं। उनके अनुभवों को प्रतीकों से जोड़ना महत्वपूर्ण है। गणित मूर्त और अमूर्त से जुड़ने और जूझने का प्रयास है अवधारणाएँ अमूर्त होती हैं चाहे विषय कोई भी हो।  गणितीय अमूर्तता को मूर्त, ठोस चीजों की मदद से सरल बनाया जा सकता है। जब मूर्त को अमूर्त से जोड़ा जाता है तो अमूर्त का अर्थ स्पष्ट हो जाता है।  प्रस्तुतीकरण के तरीकों से भी कई बार गणित अमूर्त प्रतीत होने लगता है। शुरुआती दिनों में गणित सीखने में ठोस वस्तुओं की भूमिका अहम होती है इस उम्र में बच्चे स्वाभाविक तौर पर तरह-तरह की चीजों से खेलते हैं, उन्हें जमाते. बिगाड़ते और फिर से जमाते हैं।  इस प्रक्रिया में उनकी

गणित में जोड़ शिक्षण के तरीके और गतिविधियां, देखें गतिविधियों के माध्यम से

गणित सीखने-सिखाने के परम्परागत तरीकों में गणित सीखने की प्रक्रिया की लगातार होती गयी है और धीरे-धीरे वह परिणाम आधारित हो गयी।  आप भी अपनी कक्षा में यही सब नहीं कर रहे हैं? कैसा माहौल रहता है आपकी गणित की कक्षा में? इसी माहौल से गुजर कर आपके सवालों के सही जवाब भी देने लगते होंगे।  पर क्या आपने जानने की कोशिश की कि ने सही जवाब देने के लिए किस प्रक्रिया को अपनाया? एक साधारण जोड़ को बच्चे ने इस प्रकार किया।   यहाँ विचार करें तो आप पाते हैं कि पहले प्रश्न को बच्चे ने सही हल किया परन्तु दूसरे शल में वही प्रक्रिया अपनाने के बाद भी क्यों उसका उत्तर सही नहीं हैं? क्या हमारी लक्ष्य केवल इतना है कि बच्चा जोड़ना सीख लें? या उसमें जोड़ करने की प्रक्रिया की समझ भी विकसित करनी है वास्तव में जोड़ की समझ के विकास में निहित है। दो या अधिक वस्तुओं या चीजों को एक साथ मिलने से परिणाम के रूप में वस्तुओं की संख्या का बढ़ना। स्थानीय मान का शामिल होना। . यह समझना है कि हासिल अर्थात जोड़ की क्रिया में परिणाम दस या अधिक होने पर दहाई की संख्या अपने बायें स्थित दहाइयों में जुड़ती हैं जिसे हासिल समझा जाता है। . परि

दीक्षा प्रशिक्षण (FLN सम्बन्धित समस्त लिंक एक साथ, किन्हीं कारणों से छूट गया हो,उसे पूर्ण करें

  दीक्षा प्रशिक्षण (FLN सम्बन्धित समस्त लिंक एक साथ) अन्तिम तिथि- 30/11/2022 निम्नलिखित आनलाइन दीक्षा प्रशिक्षण में से जो भी किन्हीं कारणों से छूट गया हो,उसे पूर्ण किया जा सकता है – 1- निपुण भारत मिशन: कक्षा शिक्षण में अनुप्रयोग- भाग 1 https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31359692287848448013172 2- निपुण भारत मिशन: कक्षा शिक्षण में अनुप्रयोग- भाग 2 https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31359692287848448013172 3- निपुण भारत मिशन: परिचय https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_3136026704328048641426 4- स्वमूल्यांकन एवं स्वविकास https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_3136026692849418241784 5- भाषा क्यों और कैसे ? https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31360765315176857612314 6- भाषा की कक्षा कैसी हो? https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31360765398087270412320 7- प्राथमिक कक्षाओं में साक्षरता और भाषा शिक्षण https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_313612629098962944170/ 8- भाषा शिक्षण में उपयोगी TLM और ICT सामग्र

भाषा विकास के तरीके एवं सम्बन्धित गतिविधियां

शिक्षक प्रतिवर्ष माह अप्रैल में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों का आरग्भिक परीक्षण करके उनके अधिगम सम्प्रापित स्तर जानने की प्रक्रिया करेंगे जो बच्चे आरम्भिक परीक्षण में कक्षा 1-2 के लर्निग आउटकम के स्तर पर होंगे उन्हें 50 कार्य दिवसीय फाउण्डेशन लर्निंग शिविर में भाषा/ गणितीय गतिविधियां सम्पादित करके मुख्यधारा में लाना होगा तत्पश्चात् कक्षा 3-4 और 5 की भाषा / गणितीय दक्षताओं के विकास की गतिविधियों सम्पादित करना उचित होगा। भाषा उपयोग से ही सीखी जाती है। इसलिए भाषा शिक्षण में सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने के कारण का उपयोग करना चाहिए।  शिक्षक के रूप में हमारा कार्य है बच्चों में भाषा के विविध रूपों में उपयोग का कारण उत्पन्न करना।  भाषा में अर्थ का निर्माण सन्दर्भ के सहारे होता है। हम अपने मन में कही अथवा सुनी गई बात के अर्थ का निर्माण करते हैं, फिर उसकी अभिव्यक्ति होती है मन में शब्दों के माध्यम से छवि बनाना भाषा सीखने के लिए सबसे आवश्यक है। इस स्तर पर भाषा शिक्षण में निम्नांकित बातों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। कक्षा में व्यक्तिगत और समूह कार्य का उचित संतुलन बनाये रखना। कक्षा में बातचीत को

ऐसे तैयार करें 'निपुण भारत' का रजिस्टर रिकॉर्ड, यहां देखें

  ऐसे तैयार करें 'निपुण भारत' का रजिस्टर रिकॉर्ड, यहां देखें

सीखने के प्रतिफल, शिक्षण-विधियाँ, समावेशी शिक्षा में आ शिक्षकों की भूमिका

रा.शै.अ.प्र.प. ने सीखने के प्रतिफल को विकसित किया है जो पठन सामग्री को रटकर याद करने पर आधारित मूल्यांकन से दूर हटाने के लिए बनाया गया है।  योग्यता (सीखने के प्रतिफल) आधारित मूल्यांकन पर जोर देकर, शिक्षकों और पूरी व्यवस्था को यह समझने में मदद की गई है कि बच्चे ज्ञान, कौशल और सामाजिक-व्यक्तिगत गुणों और दृष्टिकोणों में परिवर्तन के मामले में वर्ष के दौरान एक विशेष कक्षा में क्या हासिल करेंगे।  सीखने के प्रतिफल ज्ञान और कौशल से परिपूर्ण ऐसे कथन हैं जिन्हें बच्चों को एक विशेष कक्षा या पाठ्यक्रम के अंत तक प्राप्त करने की आवश्यकता है और यह अधिगम संवर्धन की उन शिक्षणशास्त्रीय विधियों से समर्थित हैं जिनका क्रियान्वयन शिक्षकों द्वारा करने की आवश्यकता है।  ये कथन प्रक्रिया आधारित हैं और समग्र विकास के पैमाने पर बच्चे की प्रगति का आकलन करने के लिए गुणात्मक या मात्रात्मक दोनों तरीके से जाँच योग्य बिंदु प्रदान करते हैं। पर्यावरणीय अध्ययन के लिए सीखने के दो प्रतिफल नीचे दिए गए हैं। . विद्यार्थी विभिन्न आयुवर्ग के लोगों, जानवरों और पक्षियों में भोजन तथा पानी की आवश्यकता, भोजन और पानी की उपलब्धता तथा घ

विद्यालयों में सहशैक्षिक गतिविधियों को कैसे क्रियान्वित करें?

प्रारम्भिक विद्यालयों में सह शैक्षिक गतिविधियों के आयोजन में प्रधानाध्यापक एवं अध्यापक की भूमिका को निम्नवत् देखा जा सकता है।  • विद्यालयों में सहशैक्षिक गतिविधियों को कैसे क्रियान्वित करें, इसके बारे में परस्पर चर्चा करना तथा आवश्यक सहयोग प्रदान करते हुए निरंतर संवाद बनाये रखना। क्रियाकलापों का अनुश्रवण करना तथा आयी हुई समस्याओं का निराकरण सभी की सहभागिता द्वारा करना। इन क्रियाकलापों में बालिकाओं की सहभागिता अधिक से अधिक हो साथ ही साथ सभी छात्रों की प्रतिभागिता सुनिश्चित हो, इस हेतु सामूहिक जिम्मेदारी लेना।। • समय सारिणी में खेलकूद/ पीटी,ड्राइंग, क्राफ्ट, संगीत, सिलाई/बुनाई व विज्ञान के कार्यों प्रतियोगिताएं हेतु स्थान व वादन को सुनिश्चित करना।  • स्कूलों में माहवार/त्रैमासिक कितनी बार किस प्रकार की प्रतियोगिताएं कराई गई, इसकी जानकारी प्राप्त करना एवं रिकार्ड करना। बच्चों के स्तर एवं रुचि के अनुसार कहानियां, चुटकुले, कविता आदि का संकलन स्वयं करना तथा बच्चों से कराना।  • विज्ञान/गणित सम्बन्धी प्रतियोगिताओं हेतु विषय से सम्बन्धित प्रश्न बैंक रखना। आवश्यक वस्तुओं का संग्रह रखना। जन सहभाग

प्री-प्राइमरी के बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक एवं शिक्षामित्र होंगे प्रशिक्षित, पढ़े विस्तृत जानकारी

कुशीनगर:  प्री-प्राइमरी के बच्चों को पढ़ाने के लिए जिले के कक्षा पांच तक के परिषदीय स्कूलों के शिक्षक व शिक्षामित्रों को प्रशिक्षित किया जायेगा निपुण भारत मिशन के तहत बीआरसी वार प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर उन्हें ट्रेंड किया जायेगा। इन्हें प्रशिक्षित करने के लिए जिले में तैनात सभी 70 एआरपी को प्रशिक्षक नियुक्त किया गया है। फरवरी के प्रथम सप्ताह से बीआरसी पर प्रशिक्षण शुरू होगा। समग्र शिक्षा अभियान के तहत बच्चों में बुनियादी भाषा व गणित में कौशल विकास के लिए प्राथमिक विद्यालय में तैनात सभी शिक्षक व शिक्षामित्रों को फाउंडेशनल लिटरेसी एवं न्यूमरेसी एफएलएन अधारित प्रशिक्षण दिया जायेगा।  मिशन प्रेरणा के द्वितीय चरण के निपुण भारत मिशन के तहत शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जायेगा।  प्रत्येक ब्लॉक में 2 से 3 बैच बनाकर प्रशिक्षित किया जायेगा। चार दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को भोजन व नास्ता के साथ प्रशिक्षण में सहायक सामग्री प्रदान की जायेगी। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।  जिले के प्राथमिक स्तर के 6200 शिक्षक व 2300 शिक्षामित्रों को बैचवार प्रशिक्षित किया जायेगा। उन्हे

दीक्षा प्रशिक्षण (FLN सम्बन्धित समस्त लिंक एक साथ) अन्तिम तिथि- 30/11/2022 निम्नलिखित आनलाइन दीक्षा प्रशिक्षण में से जो भी किन्हीं कारणों से छूट गया हो,उसे पूर्ण किया जा सकता है –

  दीक्षा प्रशिक्षण (FLN सम्बन्धित समस्त लिंक एक साथ) अन्तिम तिथि- 30/11/2022 निम्नलिखित आनलाइन दीक्षा प्रशिक्षण में से जो भी किन्हीं कारणों से छूट गया हो,उसे पूर्ण किया जा सकता है – दीक्षा प्रशिक्षण (FLN सम्बन्धित समस्त लिंक एक साथ) अन्तिम तिथि- 30/11/2022 निम्नलिखित आनलाइन दीक्षा प्रशिक्षण में से जो भी किन्हीं कारणों से छूट गया हो,उसे पूर्ण किया जा सकता है – 1- निपुण भारत मिशन: कक्षा शिक्षण में अनुप्रयोग- भाग 1 https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31359692287848448013172 2- निपुण भारत मिशन: कक्षा शिक्षण में अनुप्रयोग- भाग 2 https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31359692287848448013172 3- निपुण भारत मिशन: परिचय https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_3136026704328048641426 4- स्वमूल्यांकन एवं स्वविकास https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_3136026692849418241784 5- भाषा क्यों और कैसे ? https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31360765315176857612314 6- भाषा की कक्षा कैसी हो? https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31360765

सभी विद्यालयों नवीन प्रबंध समिति (SMC) के गठन के संबंध में शासनादेश जारी, देखें गठन संबंधी निर्देश व नियम

  सभी विद्यालयों नवीन प्रबंध समिति (SMC) के गठन के संबंध में शासनादेश जारी, देखें गठन संबंधी निर्देश व नियम निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 एवं उत्तर प्रदेश निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली-2011 के अन्तर्गत प्रदेश के गैर अनुदानित विद्यालयों को छोड़ कर समस्त विद्यालयों मे प्रबन्ध समिति का गठन किये जाने किए जाने के सम्बन्ध में।