सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

CTET 2021: सीटेट परीक्षा में 16 से 24 दिसंबेर तक पूछे गए CDP के सवाल, इन्हें पढ़ बनाए आगे की रणनीति

 Memory Based Questions: केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) 2021 सीबीएसई द्वारा प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तरों के लिए 13 जनवरी 2022 तक ऑनलाइन मोड में आयोजित की जा रही है। 


शिक्षक बनने के लिए देश भर के लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल हो रहे हैं।अब तक सीटेट परीक्षा की कई स्विफ्ट आयोजित की जा चुकी हैं तथा अभी कई शिफ्ट की परीक्षाएं होना बाकी हैं। 

CTET परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों द्वारा दिए गए फीडबैक के अनुसार परीक्षा में अब तक मॉडरेट लेवल के सवाल पूछे जा रहे हैं।

इस आर्टिकल में हम 16 दिसंबर से 24  दिसंबर तक आयोजित विभिन्न शिफ़्ट की परीक्षा में सम्मिलित अभ्यर्थियों द्वारा शेयर किए गए “बाल विकास शिक्षा शास्त्र” (CDP) के स्मृति आधारित  स्मृति आधारित सवाल लेकर आए हैं यदि आपकी परीक्षा आगामी शिफ्ट में होनी है तो बाल विकास शिक्षा शास्त्र के यह सवाल आपको परीक्षा की अच्छी तैयारी करने में मदद कर सकते हैं।-CTET 2021 CDP Memory Based Questions

यहाँ पढ़े परीक्षा में पूछे गए CDP सारे सवाल-CTET 2021CDP Memory Based Questions (16 से 24 Dec Shift 1&2)

Q1.वाइगोत्सकी के अनुसार एक बच्चा जिन कार्यों को अपने से दक्ष व्यक्ति की सहायता से पूरा कर सकता है। उसकी ऊपरी सीमा कहलाती है?


(a) संभावित विकास का स्तर


(b) वास्तविक विकासात्मक स्तर


(c) समीपस्थ विकास का क्षेत्र


(d) सभी विकल्प सही हैं


Ans:- (a)


Q2.बालकों की सामाजिक दक्षता के विकास के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी परवरिश शैली अधिकतम प्रभावी है?


(a) कृपालु


(b) प्राधिकारिक


(c) अधिनायकवादी


(d) लापरवाह


Ans:- (b)


Q3.निम्नलिखित में से कौन सा उपकरण संरचनात्मक आकलन के लिए उपयुक्त प्रतीत नहीं होता है?


(a) प्रश्नोत्तरी


(b) वार्तालाप


(c) मानदंड संदर्भित परीक्षण


(d) समूह परिचर्चा


Ans:- (c)


Q4.निम्नलिखित में से कौन सा पूरक अधिगम नियम थार्नडाइक द्वारा प्रतिपादित किया गया?


(a) तत्परता का नियम


(b) प्रभाव का नियम


(c) बहु अनुक्रिया का नियम


(d) अभ्यास का नियम


Ans:- (c)


Q5. एक पूर्व संक्रियात्मक स्तर के बच्चे की वह प्रवृत्ति जिसमें वह किसी परिस्थिति के सिर्फ एक पहलू पर ध्यान देता है और अन्य पहलुओं की उपेक्षा करता है , को पियाजे ने कहा :


(a) अनुकूलन


(b) केंद्रीकरण


(c) संरक्षण


(d) क्रमबद्धता


Ans:- (b)


Q6. एक बच्चा कहता है कि “मां आज सूरज उदास है ” वह निम्नलिखित में से पूर्व संक्रियात्मक चिंतन की किस सीमा की ओर संकेत कर रहा है?


(a) एनिमिज्म


(b) आदर्शवाद


(c) प्रकृतिवाद


(d) आत्मकेन्द्रण


Ans:- (a)


Q7. बहु – बुद्धि का सिद्धांत जो देता है कि :


(a)  बुद्धि लब्धि केवल वस्तुनिष्ठ परीक्षण ओं द्वारा ही मापी जा सकती है


(b) बुद्धिमत्ता की विभिन्न दशाएँ है


(c) बुद्धिमत्ता मे कोई व्यकितगत विभिन्नताएं नही होती है


(d) एक आयाम मे बुद्धिमत्ता ,अन्य सभी आयामों में बुद्धिमता निर्धारित करती है


Ans:- (b)


Q8.लॉरेंस कोलबर्ग के सिद्धांत के अनुसार “किसी कार्य को इसीलिए करना , क्योंकि दूसरे इसे स्वीकृति देते हैं ” नैतिक विकास के किस चरण को दर्शाता है?


(a) प्रथागत


(b) उत्तर प्रथागत


(c) अमूर्त्त संक्रियात्मक


(d) प्रथा-पूर्व


Ans:- (a)


Q9.निम्न में से कौन सा विकास का सिद्धांत नहीं है?


(a) विकास अनुवांशिक एवं पर्यावरण दोनों के द्वारा प्रभावित होता है


(b) विकास जीवन पर्यन्त होता है


(c) विकास परिवर्त्य होता है


(d) विकास सार्वभौमिक है तथा सांस्कृतिक संदर्भ इसे प्रभावित नहीं करते


Ans:- (d)


Q10. निम्न में से कौन सा द्वितीयक सामाजिक एजेंसी का उदाहरण है?


(a) मीडिया एवं पास पडोस


(b)  विद्यालय एवं मीडिया


(c) परिवार एवं पास-पडोस


(d) परिवार एवं मीडिया


Ans:- (b)


Q11. ” पुरूष और महिला की भूमिकाओं का निर्धारण समाज करता है”यह कथन बताता है कि


(a)  लैंगिकता एक आनुवंशिक प्रतिभा है


(b) लैंगिकता एक अंतर्ज्ञानी अवतरण है


(c) लैंगिकता एक सामाजिक अवतरण है


(d) लैंगिकता एक अंतर्निहित अवतरण है


Ans:- (c)


Q12. ‘विकास की कभी ना खत्म होने वाली प्रक्रिया है। ‘


(a)  निरंतरता का सिद्धांत


(b) अंतरसम्बन्ध का सिद्धांत


(c) एकीकरण का सिद्धांत


(d) अंतर्क्रिया का सिद्धांत


Ans:- (a)


Q13. रचनात्मक जवाब की आवश्यकता है ?


(a) प्रत्यक्ष शिक्षण और अप्रत्यक्ष प्रश्न


(b) सामग्री -आधारित प्रश्न


(c) एक उच्च अनुशासित कक्षा


(d) ओपन एंडेड प्रश्न


Ans:- (d)


Q14.समावेशी शिक्षा क्या है?


(a) कक्षा में विविधता का उत्सव मनाती है


(b) दाखिले सम्बन्धी कठोर प्रक्रियाओ को बढावा देती है


(c) तथ्यो की शिक्षा से सम्बन्धित है


(d) हाशिए पर स्थित वर्गो से शिक्षको को सम्मिलित करने से सम्बन्धित है 


Ans:- (a)


Q16. निम्न में से कौन सी प्रगतिशील शिक्षा की विशेषता है?


(a) बार-बार ली जाने वाली परीक्षाएं


(b) समय -सारणी और बैठने की व्यवस्था में लचीलापन


(c) केवल प्रस्तावित पाठ्य पुस्तकों पर आधारित अनुदेश


(d) परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने पर बल


Ans:- (b)


Q17. NEP 2020 के विकास पर विशेष जोर देता है ______


(a) रोजगार देने कारोजगार देने का प्रावधान


(b) दुनिया में सबसे अच्छा बुनियादी ढांचा


(c) मुफ्त शिक्षा देने का प्रावधान


(d) प्रत्येक व्यक्ति की रचनात्मक क्षमता


Ans:- (d)


Q18.सतत् और व्यापक मूल्यांकन से तात्पर्य है?


(a) कक्षा में सभी छात्रों का नियमित मूल्यांकन


(b) छात्रो के विकास का दैनिक मूल्यांकन


(c) छात्रों के नियमित मूल्यांकन की एक प्रणाली जो छात्रों के विकास के सभी पहलुओं को शामिल करती है


(d) उपरोक्त सभी


Ans:- (c)


Q19. प्रेरणा की आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत के तहत निम्न में से कौन सा निम्नतम स्तर की आवश्यकता है?


(a) आत्म सम्मान की जरूरत


(b) सुरक्षा आवश्यकताएं


(c) शारीरिक आवश्यकताएं


(d) सामाजिक जरूरते


Ans:- (c)


Q20. एक शिक्षक का इरादा छात्रों की सीखने की कठिनाइयो का पता लगाना है । इनमें से किस परीक्षण का उपयोग किया जा सकता है?


(a) योगात्मक परीक्षण


(b) रचनात्मक परीक्षण


(c) प्रदर्शन परीक्षण


(d) निदानात्मक परीक्षण


Ans:- (d)


Q21.उपचारात्मक कार्यक्रम को ध्यान में रखकर बनाया गया है?


(a) प्रत्येक छात्र की ताकत और कमजोरी


(b) प्रत्येक छात्र की ताकत


(c) प्रत्येक छात्र की कमजोरी


(d) उपरोक्त में से कोई नहीं


Ans:- (a)


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गणित सीखने-सिखाने का सही क्रम क्या होना चाहिए?

बच्चों के पास स्कूल आने से पहले गणित से सम्बन्धित अनेक अनुभव पास होते हैं बच्चों के तमाम खेल ऐसे जिनमें वे सैंकड़े से लेकर हजार तक का हिसाब रखते हैं। वे अपने खेलों में चीजों का बराबर बँटवारा कर लेते हैं।  अपनी चीजों का हिसाब रखते हैं। छोटा-बड़ा, कम-ज्यादा, आगे-पीछे, उपर-नीचे, समूह बनाना, तुलना करना, गणना करना, मुद्रा की पहचान, दूरी का अनुमान, घटना-बढ़ना जैसी तमाम अवधारणाओं से बच्चे परिचित होते हैं।  हम बच्चों को प्रतीक ही सिखाते हैं। उनके अनुभवों को प्रतीकों से जोड़ना महत्वपूर्ण है। गणित मूर्त और अमूर्त से जुड़ने और जूझने का प्रयास है अवधारणाएँ अमूर्त होती हैं चाहे विषय कोई भी हो।  गणितीय अमूर्तता को मूर्त, ठोस चीजों की मदद से सरल बनाया जा सकता है। जब मूर्त को अमूर्त से जोड़ा जाता है तो अमूर्त का अर्थ स्पष्ट हो जाता है।  प्रस्तुतीकरण के तरीकों से भी कई बार गणित अमूर्त प्रतीत होने लगता है। शुरुआती दिनों में गणित सीखने में ठोस वस्तुओं की भूमिका अहम होती है इस उम्र में बच्चे स्वाभाविक तौर पर तरह-तरह की चीजों से खेलते हैं, उन्हें जमाते. बिगाड़ते और फिर से जमाते हैं।  इस प्रक्रिया में उनकी

गणित में जोड़ शिक्षण के तरीके और गतिविधियां, देखें गतिविधियों के माध्यम से

गणित सीखने-सिखाने के परम्परागत तरीकों में गणित सीखने की प्रक्रिया की लगातार होती गयी है और धीरे-धीरे वह परिणाम आधारित हो गयी।  आप भी अपनी कक्षा में यही सब नहीं कर रहे हैं? कैसा माहौल रहता है आपकी गणित की कक्षा में? इसी माहौल से गुजर कर आपके सवालों के सही जवाब भी देने लगते होंगे।  पर क्या आपने जानने की कोशिश की कि ने सही जवाब देने के लिए किस प्रक्रिया को अपनाया? एक साधारण जोड़ को बच्चे ने इस प्रकार किया।   यहाँ विचार करें तो आप पाते हैं कि पहले प्रश्न को बच्चे ने सही हल किया परन्तु दूसरे शल में वही प्रक्रिया अपनाने के बाद भी क्यों उसका उत्तर सही नहीं हैं? क्या हमारी लक्ष्य केवल इतना है कि बच्चा जोड़ना सीख लें? या उसमें जोड़ करने की प्रक्रिया की समझ भी विकसित करनी है वास्तव में जोड़ की समझ के विकास में निहित है। दो या अधिक वस्तुओं या चीजों को एक साथ मिलने से परिणाम के रूप में वस्तुओं की संख्या का बढ़ना। स्थानीय मान का शामिल होना। . यह समझना है कि हासिल अर्थात जोड़ की क्रिया में परिणाम दस या अधिक होने पर दहाई की संख्या अपने बायें स्थित दहाइयों में जुड़ती हैं जिसे हासिल समझा जाता है। . परि

दीक्षा प्रशिक्षण (FLN सम्बन्धित समस्त लिंक एक साथ, किन्हीं कारणों से छूट गया हो,उसे पूर्ण करें

  दीक्षा प्रशिक्षण (FLN सम्बन्धित समस्त लिंक एक साथ) अन्तिम तिथि- 30/11/2022 निम्नलिखित आनलाइन दीक्षा प्रशिक्षण में से जो भी किन्हीं कारणों से छूट गया हो,उसे पूर्ण किया जा सकता है – 1- निपुण भारत मिशन: कक्षा शिक्षण में अनुप्रयोग- भाग 1 https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31359692287848448013172 2- निपुण भारत मिशन: कक्षा शिक्षण में अनुप्रयोग- भाग 2 https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31359692287848448013172 3- निपुण भारत मिशन: परिचय https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_3136026704328048641426 4- स्वमूल्यांकन एवं स्वविकास https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_3136026692849418241784 5- भाषा क्यों और कैसे ? https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31360765315176857612314 6- भाषा की कक्षा कैसी हो? https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31360765398087270412320 7- प्राथमिक कक्षाओं में साक्षरता और भाषा शिक्षण https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_313612629098962944170/ 8- भाषा शिक्षण में उपयोगी TLM और ICT सामग्र

भाषा विकास के तरीके एवं सम्बन्धित गतिविधियां

शिक्षक प्रतिवर्ष माह अप्रैल में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों का आरग्भिक परीक्षण करके उनके अधिगम सम्प्रापित स्तर जानने की प्रक्रिया करेंगे जो बच्चे आरम्भिक परीक्षण में कक्षा 1-2 के लर्निग आउटकम के स्तर पर होंगे उन्हें 50 कार्य दिवसीय फाउण्डेशन लर्निंग शिविर में भाषा/ गणितीय गतिविधियां सम्पादित करके मुख्यधारा में लाना होगा तत्पश्चात् कक्षा 3-4 और 5 की भाषा / गणितीय दक्षताओं के विकास की गतिविधियों सम्पादित करना उचित होगा। भाषा उपयोग से ही सीखी जाती है। इसलिए भाषा शिक्षण में सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने के कारण का उपयोग करना चाहिए।  शिक्षक के रूप में हमारा कार्य है बच्चों में भाषा के विविध रूपों में उपयोग का कारण उत्पन्न करना।  भाषा में अर्थ का निर्माण सन्दर्भ के सहारे होता है। हम अपने मन में कही अथवा सुनी गई बात के अर्थ का निर्माण करते हैं, फिर उसकी अभिव्यक्ति होती है मन में शब्दों के माध्यम से छवि बनाना भाषा सीखने के लिए सबसे आवश्यक है। इस स्तर पर भाषा शिक्षण में निम्नांकित बातों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। कक्षा में व्यक्तिगत और समूह कार्य का उचित संतुलन बनाये रखना। कक्षा में बातचीत को

ऐसे तैयार करें 'निपुण भारत' का रजिस्टर रिकॉर्ड, यहां देखें

  ऐसे तैयार करें 'निपुण भारत' का रजिस्टर रिकॉर्ड, यहां देखें

सीखने के प्रतिफल, शिक्षण-विधियाँ, समावेशी शिक्षा में आ शिक्षकों की भूमिका

रा.शै.अ.प्र.प. ने सीखने के प्रतिफल को विकसित किया है जो पठन सामग्री को रटकर याद करने पर आधारित मूल्यांकन से दूर हटाने के लिए बनाया गया है।  योग्यता (सीखने के प्रतिफल) आधारित मूल्यांकन पर जोर देकर, शिक्षकों और पूरी व्यवस्था को यह समझने में मदद की गई है कि बच्चे ज्ञान, कौशल और सामाजिक-व्यक्तिगत गुणों और दृष्टिकोणों में परिवर्तन के मामले में वर्ष के दौरान एक विशेष कक्षा में क्या हासिल करेंगे।  सीखने के प्रतिफल ज्ञान और कौशल से परिपूर्ण ऐसे कथन हैं जिन्हें बच्चों को एक विशेष कक्षा या पाठ्यक्रम के अंत तक प्राप्त करने की आवश्यकता है और यह अधिगम संवर्धन की उन शिक्षणशास्त्रीय विधियों से समर्थित हैं जिनका क्रियान्वयन शिक्षकों द्वारा करने की आवश्यकता है।  ये कथन प्रक्रिया आधारित हैं और समग्र विकास के पैमाने पर बच्चे की प्रगति का आकलन करने के लिए गुणात्मक या मात्रात्मक दोनों तरीके से जाँच योग्य बिंदु प्रदान करते हैं। पर्यावरणीय अध्ययन के लिए सीखने के दो प्रतिफल नीचे दिए गए हैं। . विद्यार्थी विभिन्न आयुवर्ग के लोगों, जानवरों और पक्षियों में भोजन तथा पानी की आवश्यकता, भोजन और पानी की उपलब्धता तथा घ

विद्यालयों में सहशैक्षिक गतिविधियों को कैसे क्रियान्वित करें?

प्रारम्भिक विद्यालयों में सह शैक्षिक गतिविधियों के आयोजन में प्रधानाध्यापक एवं अध्यापक की भूमिका को निम्नवत् देखा जा सकता है।  • विद्यालयों में सहशैक्षिक गतिविधियों को कैसे क्रियान्वित करें, इसके बारे में परस्पर चर्चा करना तथा आवश्यक सहयोग प्रदान करते हुए निरंतर संवाद बनाये रखना। क्रियाकलापों का अनुश्रवण करना तथा आयी हुई समस्याओं का निराकरण सभी की सहभागिता द्वारा करना। इन क्रियाकलापों में बालिकाओं की सहभागिता अधिक से अधिक हो साथ ही साथ सभी छात्रों की प्रतिभागिता सुनिश्चित हो, इस हेतु सामूहिक जिम्मेदारी लेना।। • समय सारिणी में खेलकूद/ पीटी,ड्राइंग, क्राफ्ट, संगीत, सिलाई/बुनाई व विज्ञान के कार्यों प्रतियोगिताएं हेतु स्थान व वादन को सुनिश्चित करना।  • स्कूलों में माहवार/त्रैमासिक कितनी बार किस प्रकार की प्रतियोगिताएं कराई गई, इसकी जानकारी प्राप्त करना एवं रिकार्ड करना। बच्चों के स्तर एवं रुचि के अनुसार कहानियां, चुटकुले, कविता आदि का संकलन स्वयं करना तथा बच्चों से कराना।  • विज्ञान/गणित सम्बन्धी प्रतियोगिताओं हेतु विषय से सम्बन्धित प्रश्न बैंक रखना। आवश्यक वस्तुओं का संग्रह रखना। जन सहभाग

प्री-प्राइमरी के बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक एवं शिक्षामित्र होंगे प्रशिक्षित, पढ़े विस्तृत जानकारी

कुशीनगर:  प्री-प्राइमरी के बच्चों को पढ़ाने के लिए जिले के कक्षा पांच तक के परिषदीय स्कूलों के शिक्षक व शिक्षामित्रों को प्रशिक्षित किया जायेगा निपुण भारत मिशन के तहत बीआरसी वार प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर उन्हें ट्रेंड किया जायेगा। इन्हें प्रशिक्षित करने के लिए जिले में तैनात सभी 70 एआरपी को प्रशिक्षक नियुक्त किया गया है। फरवरी के प्रथम सप्ताह से बीआरसी पर प्रशिक्षण शुरू होगा। समग्र शिक्षा अभियान के तहत बच्चों में बुनियादी भाषा व गणित में कौशल विकास के लिए प्राथमिक विद्यालय में तैनात सभी शिक्षक व शिक्षामित्रों को फाउंडेशनल लिटरेसी एवं न्यूमरेसी एफएलएन अधारित प्रशिक्षण दिया जायेगा।  मिशन प्रेरणा के द्वितीय चरण के निपुण भारत मिशन के तहत शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जायेगा।  प्रत्येक ब्लॉक में 2 से 3 बैच बनाकर प्रशिक्षित किया जायेगा। चार दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को भोजन व नास्ता के साथ प्रशिक्षण में सहायक सामग्री प्रदान की जायेगी। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।  जिले के प्राथमिक स्तर के 6200 शिक्षक व 2300 शिक्षामित्रों को बैचवार प्रशिक्षित किया जायेगा। उन्हे

दीक्षा प्रशिक्षण (FLN सम्बन्धित समस्त लिंक एक साथ) अन्तिम तिथि- 30/11/2022 निम्नलिखित आनलाइन दीक्षा प्रशिक्षण में से जो भी किन्हीं कारणों से छूट गया हो,उसे पूर्ण किया जा सकता है –

  दीक्षा प्रशिक्षण (FLN सम्बन्धित समस्त लिंक एक साथ) अन्तिम तिथि- 30/11/2022 निम्नलिखित आनलाइन दीक्षा प्रशिक्षण में से जो भी किन्हीं कारणों से छूट गया हो,उसे पूर्ण किया जा सकता है – दीक्षा प्रशिक्षण (FLN सम्बन्धित समस्त लिंक एक साथ) अन्तिम तिथि- 30/11/2022 निम्नलिखित आनलाइन दीक्षा प्रशिक्षण में से जो भी किन्हीं कारणों से छूट गया हो,उसे पूर्ण किया जा सकता है – 1- निपुण भारत मिशन: कक्षा शिक्षण में अनुप्रयोग- भाग 1 https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31359692287848448013172 2- निपुण भारत मिशन: कक्षा शिक्षण में अनुप्रयोग- भाग 2 https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31359692287848448013172 3- निपुण भारत मिशन: परिचय https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_3136026704328048641426 4- स्वमूल्यांकन एवं स्वविकास https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_3136026692849418241784 5- भाषा क्यों और कैसे ? https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31360765315176857612314 6- भाषा की कक्षा कैसी हो? https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31360765

आकलन प्रपत्र का निर्माण कैसे करें? देखें कक्षा- 1 गणित का सैम्पल प्रपत्र

आकलन प्रपत्र का निर्माण बच्चों के स्तर को जानने के लिए किया जाता है, जिससे आगामी शिक्षण योजना का निर्माण किया जा सके। प्रारंभिक आकलन के पश्चात ही शिक्षण योजना के अनुसार कार्य प्रारंभ करना चाहिए।