सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मिशन प्रेरणा ई- पाठशाला 5.0 19/07/2021 आओ अंग्रेजी सीखें के एपिसोड

📒 *मिशन प्रेरणा ई- पाठशाला 5.0*📒


          ⭕ *19/07/2021*⭕

     

👉 *आओ अंग्रेजी सीखें के एपिसोड*


⭕ *एपिसोड  44* 

https://youtu.be/MpSxPSCjJz0


⭕ *एपिसोड 43*

https://youtu.be/9ze6DrvSeCU

______________________________


📡 *दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले आज के शैक्षिक कार्यक्रमों के यू ट्यूब लिंक 🔗-*  


➡️09:00 AM  कक्षा 03    हिंदी  चाँद  का  कुर्ता 

https://youtu.be/mR7wUsDKHFg


➡️09:30 AM Class 4   English  In The Park

https://youtu.be/1rEA4wSJIig


➡️10:00 AM  कक्षा  5  गणित      हमारा  परिवेश  जीव  जंतुओं  की  रोचक  बातें

https://youtu.be/pmudtUw7u98


➡️10:30 AM कक्षा  06     विज्ञान    पृथ्वी  के  परिमंडल

https://youtu.be/vsrkjhKDU8E


➡️11:00 AM कक्षा  07   इतिहास     हमारा  इतिहास  और  नागरिक  जीवन

https://youtu.be/rlixbf2Cfrg


➡️11:30 AM कक्षा 07   विज्ञान     पौधों  में  जनन

https://youtu.be/Kk0hdskE58w


➡️12:00 PM कक्षा 08  भूगोल   उत्तर प्रदेश: अर्थ व्यवस्था और  मानव  संसाधन

https://youtu.be/YytZDYRMvGM


➡️12:30 PM कक्षा 08   विज्ञान    फसल  उत्पादन

https://youtu.be/ykzm9kNnMpg

______________________________


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गणित सीखने-सिखाने का सही क्रम क्या होना चाहिए?

बच्चों के पास स्कूल आने से पहले गणित से सम्बन्धित अनेक अनुभव पास होते हैं बच्चों के तमाम खेल ऐसे जिनमें वे सैंकड़े से लेकर हजार तक का हिसाब रखते हैं। वे अपने खेलों में चीजों का बराबर बँटवारा कर लेते हैं।  अपनी चीजों का हिसाब रखते हैं। छोटा-बड़ा, कम-ज्यादा, आगे-पीछे, उपर-नीचे, समूह बनाना, तुलना करना, गणना करना, मुद्रा की पहचान, दूरी का अनुमान, घटना-बढ़ना जैसी तमाम अवधारणाओं से बच्चे परिचित होते हैं।  हम बच्चों को प्रतीक ही सिखाते हैं। उनके अनुभवों को प्रतीकों से जोड़ना महत्वपूर्ण है। गणित मूर्त और अमूर्त से जुड़ने और जूझने का प्रयास है अवधारणाएँ अमूर्त होती हैं चाहे विषय कोई भी हो।  गणितीय अमूर्तता को मूर्त, ठोस चीजों की मदद से सरल बनाया जा सकता है। जब मूर्त को अमूर्त से जोड़ा जाता है तो अमूर्त का अर्थ स्पष्ट हो जाता है।  प्रस्तुतीकरण के तरीकों से भी कई बार गणित अमूर्त प्रतीत होने लगता है। शुरुआती दिनों में गणित सीखने में ठोस वस्तुओं की भूमिका अहम होती है इस उम्र में बच्चे स्वाभाविक तौर पर तरह-तरह की चीजों से खेलते हैं, उन्हें जमाते. बिगाड़ते और फिर से जमाते हैं।  इस प्रक्रिया में उनकी

समावेशी शिक्षा क्या है? समावेशी शिक्षा की विशेषताएं एवं रिपोटिंग/डाक्युमेन्टेशन

कक्षा में बच्चों के साथ कार्य करते हुए आपने अनुभव किया होगा कि हर बच्चा स्वयं में कोई न कोई विशिष्टता एवं विविधता लिए होता है । उनके रुचि और रुझानों में भी यह विविधता पाई जाती है।  यह विविधता काफी हद तक उनके परिवेश एवं परिस्थितियों के कारण या शारीरिक आकार प्रकार से प्रभावित होती है। बच्चों में इस विविधता के कारण कुछ खास श्रेणियाँ उभरकर आती हैं। जैसे- तेज/धीमी गति से सीखने वाले, शारीरिक कारणों से सीखने में बाधा अनुभव करने वाले बच्चे, परिवेशीय व लैंगिक विविधता वाले बच्चे।  इनमें कुछ और श्रेणियाँ भी जुड़ सकती हैं। शिक्षक के रूप में इतनी विविधता से भरे बच्चों को हमें कक्षा के भीतर सीखने का समावेशी वातावरण देना होता है। समावेशी शिक्षा अर्थात् ऐसी शिक्षा जो सबके लिए हो। विद्यालय में विविधताओं से भरे सभी प्रकार के बच्चों को एक साथ एक कक्षा में शिक्षा देना ही समावेशी शिक्षा है। समावेशी शिक्षा से तात्पर्य है वह शिक्षा जिसमें किसी एक विशेष व्यक्ति श्रेणी पर निर्भर न होकर सभी को शामिल किया जाता है । "समावेशन शब्द का अपने-आप में कुछ खास अर्थ नहीं होता है। समावेशन के चारों ओर जो वैचारिक, दार्

शिक्षण संग्रह (Compendium) : शिक्षण संग्रह की अवधारणा एवं आवश्यकता - ( Concept and Need)

यह सर्वविदित है कि प्राथमिक विद्यालय के वातावरण का प्रभाव बच्चों (विद्यार्थियों) के सम्पूर्ण जीवन पर पड़ता है। प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षक/शिक्षिका अपने कार्य एवं आचरण के माध्यम से विद्यार्थियों में अनेक अच्छी आदतों जैसे- अनुशासित रहना, विद्यालय के नियमों का पालन करना, शिक्षकों का आदर-सम्मान करना, आपस में एक दूसरे का सहयोग करना आदि को सहज रूप में अंतरित द विकसित करते रहते हैं यही गुण कालांतर में बच्चों के व्यक्तित्व एवं सामाजिक जीवन में संस्कारों के रूप में परिलक्षित होते हैं। बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में विद्यालय के शैक्षिक वातावरण की इस महत्त्वपूर्ण भूमिका के सन्दर्भ में अगर हम विचार करते हैं तो प्रमुख रूप से निम्नांकित अवयव उभर कर आते हैं विद्यालय भवन का अत्यंत आकर्षक और साफ सुथरा होना। विद्यालय भवन की बाउण्ड्री वॉल का राष्ट्रीय प्रतीकों, रोचक खेलों, पशु-पक्षियों के रंगीन चित्रों से सुसज्जित होना। विद्यालय भवन की दीवारों, खम्भों फर्श, बरामदों को महापुरुषों के चित्रों, आदर्श वाक्यों/सूक्तियों, वर्णमाला आदि से सुसज्जित होना। कक्षा-कक्षों में समय सारिणी, शैक्षिक चार्ट्स मॉडल्स, लर्