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बच्चों का चिन्हांकन - बच्चों के अधिगम स्तर में अंतर को कैसे पता करें?

एक शिक्षक होने के नाते उपरोक्त स्थितियों में आप क्या करेंगे?

1. शैक्षिक सत्र के प्रारंभ में : आपकी कक्षा (कक्षा 3 से 8 तक) में जब बच्चे प्रवेश लेते हैं तब आरम्भिक परीक्षण के माध्यम से प्रत्येक बच्चे के वर्तमान अधिगम स्तर का पता लगाया जा सकता है।

 इससे आपको बच्चों के अधिगम स्तर में अंतर का पता चल जाएगा। फिर आप आवश्यकतानुसार अपनी शिक्षण योजना बनाकर अधिगम स्तर के अंतर (गैप) को कम करने का प्रयास कर सकेंगे। 

आरम्भिक परीक्षण के लिए प्रत्येक विषय में आधारभूत आकलन प्रपत्र बनाना होगा।

 इसके प्रश्न पिछली कक्षा तक की मूलभूत दक्षताओं (लर्निंग आउटकम) के आधार पर बनाये जाएंगे। इसके लिए मूलभूत दक्षताओं की विषयवार सूची पूर्व में ही बना लें।

 उदाहरण के लिए, कक्षा 8 के बच्चों के आधारभूत आकलन प्रपत्र में कक्षा 1 से 7 की मूलभूत दक्षताओं के आधार पर प्रश्न बनाए जाएंगे यहाँ यह ध्यान रखना है कि प्रत्येक प्रश्न किस कक्षा के किस लर्निंग आउटकम पर आधारित है, यह अलग से अवश्य लिख लिया जाए। 

इससे बाद में शिक्षकों को यह जानने में आसानी होगी कि किर लर्निंग आउटकम पर बच्चों के साथ कार्य करना है। साथ ही अधिगम स्तर के अनुसार उनके समूह निर्धारण में भी आसानी होगी।

प्रश्न बनाते समय यह भी ध्यान रखना है कि इसमें ज्ञानात्मक, बोधात्मक, अनुप्रयोगात्मक तर्कात्मक प्रश्न शामिल हों। कुल प्रश्नों का 20 प्रतिशत प्रश्न ज्ञानात्मक, 50 प्रतिशत बोधात्मक, 2 प्रतिशत अनुप्रयोगात्मक व 10 प्रतिशत तर्कात्मक प्रश्न होंगे यह आवश्यक है कि प्रश्नों की संख् अधिक न हो ताकि बच्चे उन्हें आसानी से हल कर सकें।

 भाषा (हिन्दी व अंग्रेजी) में मौखिक, लिखित व पढ़ने से संबंधित प्रश्न होंगे।


आरम्भिक परीक्षण की प्रक्रिया में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखेंगे-


1. आरम्भिक परीक्षण के पूर्व:



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