सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

"निपुण भारत मिशन” के अंतर्गत शिक्षकों के प्रशिक्षण कोर्स 13, 14 और 15 के लिंक हुए जारी, क्लिक कर करें ज्वाइन

 "निपुण भारत मिशन” के अंतर्गत शिक्षकों के प्रशिक्षण कोर्स 13, 14 और 15 के लिंक हुए जारी, क्लिक कर करें ज्वाइन


शिक्षक प्रशिक्षण, उत्तर प्रदेश

Course 13, 14, 15 Launch

Start Date:- 05 September 2022

End Date:- 11 September 2022

समस्त BSA, DIET प्राचार्य, BEO, KRP, SRG, ARP, DIET मेंटर एवं अन्य सभी सदस्य कृपया ध्यान दें:-

जैसा की आप अवगत हैं कि निपुण भारत मिशन के अंतर्गत बच्चों में भाषा, गणितीय दक्षता एवं लीडरशिप विकास पर विशेष बल दिया गया है। इसी क्रम में प्रथमिक शिक्षकों की क्षमता वृद्धि हेतु दीक्षा के माध्यम से ऑनलाइन प्रशिक्षण 08 अगस्त 2022 से प्रारम्भ किया गया है जिसके अंतर्गत प्रत्येक सप्ताह दो अकादमिक तथा एक लीडरशिप कोर्स/विडियो प्रदेश-स्तर से भेजें जा रहें हैं।

सभी BSA, DIET प्राचार्य, BEO, SRG, KRP, ARP, DIET मेंटर इस अनिवार्य प्रशिक्षण से प्राथमिक विद्यालयों के कक्षा 1 से 3 तक के शिक्षकों को अनिवार्य रूप से जोड़ना सुनिश्चित करें।

प्रशिक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ व लिंक निम्वत है:-

Course 13:-👇

https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31361759460347904011995

Course 14:-👇

https://diksha.gov.in/explore-course/course/do_31361759588218470412001

Course 15 (Leadership Video Link):-👇

https://youtu.be/zP9jpxitfb4

Dashboard Link:-

http://t.ly/zDL1

नोट:-

प्रशिक्षण से पहले सभी Users अपना दीक्षा ऐप Playstore से अनिवार्य रूप से Update कर लें।

अपनी दीक्षा प्रोफाइल में District, Block, School का चयन कर update कर लें। (https://youtu.be/8sHuHUrkBxQ वीडियो लिंक का प्रयोग कर प्रोफाइल अपडेट करने की प्रक्रिया को समझ सकते हैं।)

आज्ञा से,

महानिदेशक,

स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गणित सीखने-सिखाने का सही क्रम क्या होना चाहिए?

बच्चों के पास स्कूल आने से पहले गणित से सम्बन्धित अनेक अनुभव पास होते हैं बच्चों के तमाम खेल ऐसे जिनमें वे सैंकड़े से लेकर हजार तक का हिसाब रखते हैं। वे अपने खेलों में चीजों का बराबर बँटवारा कर लेते हैं।  अपनी चीजों का हिसाब रखते हैं। छोटा-बड़ा, कम-ज्यादा, आगे-पीछे, उपर-नीचे, समूह बनाना, तुलना करना, गणना करना, मुद्रा की पहचान, दूरी का अनुमान, घटना-बढ़ना जैसी तमाम अवधारणाओं से बच्चे परिचित होते हैं।  हम बच्चों को प्रतीक ही सिखाते हैं। उनके अनुभवों को प्रतीकों से जोड़ना महत्वपूर्ण है। गणित मूर्त और अमूर्त से जुड़ने और जूझने का प्रयास है अवधारणाएँ अमूर्त होती हैं चाहे विषय कोई भी हो।  गणितीय अमूर्तता को मूर्त, ठोस चीजों की मदद से सरल बनाया जा सकता है। जब मूर्त को अमूर्त से जोड़ा जाता है तो अमूर्त का अर्थ स्पष्ट हो जाता है।  प्रस्तुतीकरण के तरीकों से भी कई बार गणित अमूर्त प्रतीत होने लगता है। शुरुआती दिनों में गणित सीखने में ठोस वस्तुओं की भूमिका अहम होती है इस उम्र में बच्चे स्वाभाविक तौर पर तरह-तरह की चीजों से खेलते हैं, उन्हें जमाते. बिगाड़ते और फिर से जमाते हैं।  इस प्रक्रिया में उनकी

गणित में जोड़ शिक्षण के तरीके और गतिविधियां, देखें गतिविधियों के माध्यम से

गणित सीखने-सिखाने के परम्परागत तरीकों में गणित सीखने की प्रक्रिया की लगातार होती गयी है और धीरे-धीरे वह परिणाम आधारित हो गयी।  आप भी अपनी कक्षा में यही सब नहीं कर रहे हैं? कैसा माहौल रहता है आपकी गणित की कक्षा में? इसी माहौल से गुजर कर आपके सवालों के सही जवाब भी देने लगते होंगे।  पर क्या आपने जानने की कोशिश की कि ने सही जवाब देने के लिए किस प्रक्रिया को अपनाया? एक साधारण जोड़ को बच्चे ने इस प्रकार किया।   यहाँ विचार करें तो आप पाते हैं कि पहले प्रश्न को बच्चे ने सही हल किया परन्तु दूसरे शल में वही प्रक्रिया अपनाने के बाद भी क्यों उसका उत्तर सही नहीं हैं? क्या हमारी लक्ष्य केवल इतना है कि बच्चा जोड़ना सीख लें? या उसमें जोड़ करने की प्रक्रिया की समझ भी विकसित करनी है वास्तव में जोड़ की समझ के विकास में निहित है। दो या अधिक वस्तुओं या चीजों को एक साथ मिलने से परिणाम के रूप में वस्तुओं की संख्या का बढ़ना। स्थानीय मान का शामिल होना। . यह समझना है कि हासिल अर्थात जोड़ की क्रिया में परिणाम दस या अधिक होने पर दहाई की संख्या अपने बायें स्थित दहाइयों में जुड़ती हैं जिसे हासिल समझा जाता है। . परि

विद्यालयों में सहशैक्षिक गतिविधियों को कैसे क्रियान्वित करें?

प्रारम्भिक विद्यालयों में सह शैक्षिक गतिविधियों के आयोजन में प्रधानाध्यापक एवं अध्यापक की भूमिका को निम्नवत् देखा जा सकता है।  • विद्यालयों में सहशैक्षिक गतिविधियों को कैसे क्रियान्वित करें, इसके बारे में परस्पर चर्चा करना तथा आवश्यक सहयोग प्रदान करते हुए निरंतर संवाद बनाये रखना। क्रियाकलापों का अनुश्रवण करना तथा आयी हुई समस्याओं का निराकरण सभी की सहभागिता द्वारा करना। इन क्रियाकलापों में बालिकाओं की सहभागिता अधिक से अधिक हो साथ ही साथ सभी छात्रों की प्रतिभागिता सुनिश्चित हो, इस हेतु सामूहिक जिम्मेदारी लेना।। • समय सारिणी में खेलकूद/ पीटी,ड्राइंग, क्राफ्ट, संगीत, सिलाई/बुनाई व विज्ञान के कार्यों प्रतियोगिताएं हेतु स्थान व वादन को सुनिश्चित करना।  • स्कूलों में माहवार/त्रैमासिक कितनी बार किस प्रकार की प्रतियोगिताएं कराई गई, इसकी जानकारी प्राप्त करना एवं रिकार्ड करना। बच्चों के स्तर एवं रुचि के अनुसार कहानियां, चुटकुले, कविता आदि का संकलन स्वयं करना तथा बच्चों से कराना।  • विज्ञान/गणित सम्बन्धी प्रतियोगिताओं हेतु विषय से सम्बन्धित प्रश्न बैंक रखना। आवश्यक वस्तुओं का संग्रह रखना। जन सहभाग

लर्निंग आउटकम एवं आकलन

आप भली भांति अवगत हैं कि विद्यालयीय पाठ्यक्रम का निर्धारण एवं पाठ्यपुस्तकों/ कार्यपुस्तिकाओं का निर्माण विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए निर्धारित दक्षताओं के विकास क ध्यान में रखकर किया गया है।  शिक्षक पाठ्यपुस्तकों/कार्यपुस्तिका व अन्य शिक्षण सहायक सामग्र के माध्यम से अपनी कक्षा-शिक्षण गतिविधियों को संचालित करते हैं।  वास्तव में कक्षा शिक्षण के उपरान्त सबसे महत्वपूर्ण एवं व्यावहारिक पक्ष यह है कि क्या बच्चे उन दक्षताओं को प्राप्त कर रहे हैं अथवा नहीं। लर्निंग आउटकम (अधिगम सम्बन्धी परिणाम): लर्निंग आउटकम इसी बात पर बल देते हैं कि मात्र शिक्षक ही नहीं अपितु अभिभावक भी य जानें कि उनका बच्चा जिस कक्षा में है, उस कक्षा के विभिन्न विषयों में उसे क्या-क्या ज्ञान होन चाहिए और क्या-क्या ज्ञान उसने अर्जित कर लिया है। 'लर्निंग आउटकम (अधिगम सम्बन्धी परिणाम ) से आशय उन परिणामों (दक्षताओं) से है जो किसी कक्षा में अध्ययनरत विद्यार्थियों को उनके निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप अपेक्षित दक्षताओं के प्राप्त होने पर परिलक्षित होते हैं। यह एक 'परिणाम आधारित लक्ष्य है' जो कि बच्चे की प्र

सीखने के प्रतिफल, शिक्षण-विधियाँ, समावेशी शिक्षा में आ शिक्षकों की भूमिका

रा.शै.अ.प्र.प. ने सीखने के प्रतिफल को विकसित किया है जो पठन सामग्री को रटकर याद करने पर आधारित मूल्यांकन से दूर हटाने के लिए बनाया गया है।  योग्यता (सीखने के प्रतिफल) आधारित मूल्यांकन पर जोर देकर, शिक्षकों और पूरी व्यवस्था को यह समझने में मदद की गई है कि बच्चे ज्ञान, कौशल और सामाजिक-व्यक्तिगत गुणों और दृष्टिकोणों में परिवर्तन के मामले में वर्ष के दौरान एक विशेष कक्षा में क्या हासिल करेंगे।  सीखने के प्रतिफल ज्ञान और कौशल से परिपूर्ण ऐसे कथन हैं जिन्हें बच्चों को एक विशेष कक्षा या पाठ्यक्रम के अंत तक प्राप्त करने की आवश्यकता है और यह अधिगम संवर्धन की उन शिक्षणशास्त्रीय विधियों से समर्थित हैं जिनका क्रियान्वयन शिक्षकों द्वारा करने की आवश्यकता है।  ये कथन प्रक्रिया आधारित हैं और समग्र विकास के पैमाने पर बच्चे की प्रगति का आकलन करने के लिए गुणात्मक या मात्रात्मक दोनों तरीके से जाँच योग्य बिंदु प्रदान करते हैं। पर्यावरणीय अध्ययन के लिए सीखने के दो प्रतिफल नीचे दिए गए हैं। . विद्यार्थी विभिन्न आयुवर्ग के लोगों, जानवरों और पक्षियों में भोजन तथा पानी की आवश्यकता, भोजन और पानी की उपलब्धता तथा घ

आकलन प्रपत्र का निर्माण कैसे करें? देखें कक्षा- 1 गणित का सैम्पल प्रपत्र

आकलन प्रपत्र का निर्माण बच्चों के स्तर को जानने के लिए किया जाता है, जिससे आगामी शिक्षण योजना का निर्माण किया जा सके। प्रारंभिक आकलन के पश्चात ही शिक्षण योजना के अनुसार कार्य प्रारंभ करना चाहिए।  

शिक्षण संग्रह (Compendium) : शिक्षण संग्रह की अवधारणा एवं आवश्यकता - ( Concept and Need)

यह सर्वविदित है कि प्राथमिक विद्यालय के वातावरण का प्रभाव बच्चों (विद्यार्थियों) के सम्पूर्ण जीवन पर पड़ता है। प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षक/शिक्षिका अपने कार्य एवं आचरण के माध्यम से विद्यार्थियों में अनेक अच्छी आदतों जैसे- अनुशासित रहना, विद्यालय के नियमों का पालन करना, शिक्षकों का आदर-सम्मान करना, आपस में एक दूसरे का सहयोग करना आदि को सहज रूप में अंतरित द विकसित करते रहते हैं यही गुण कालांतर में बच्चों के व्यक्तित्व एवं सामाजिक जीवन में संस्कारों के रूप में परिलक्षित होते हैं। बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में विद्यालय के शैक्षिक वातावरण की इस महत्त्वपूर्ण भूमिका के सन्दर्भ में अगर हम विचार करते हैं तो प्रमुख रूप से निम्नांकित अवयव उभर कर आते हैं विद्यालय भवन का अत्यंत आकर्षक और साफ सुथरा होना। विद्यालय भवन की बाउण्ड्री वॉल का राष्ट्रीय प्रतीकों, रोचक खेलों, पशु-पक्षियों के रंगीन चित्रों से सुसज्जित होना। विद्यालय भवन की दीवारों, खम्भों फर्श, बरामदों को महापुरुषों के चित्रों, आदर्श वाक्यों/सूक्तियों, वर्णमाला आदि से सुसज्जित होना। कक्षा-कक्षों में समय सारिणी, शैक्षिक चार्ट्स मॉडल्स, लर्

समावेशी शिक्षा क्या है? समावेशी शिक्षा की विशेषताएं एवं रिपोटिंग/डाक्युमेन्टेशन

कक्षा में बच्चों के साथ कार्य करते हुए आपने अनुभव किया होगा कि हर बच्चा स्वयं में कोई न कोई विशिष्टता एवं विविधता लिए होता है । उनके रुचि और रुझानों में भी यह विविधता पाई जाती है।  यह विविधता काफी हद तक उनके परिवेश एवं परिस्थितियों के कारण या शारीरिक आकार प्रकार से प्रभावित होती है। बच्चों में इस विविधता के कारण कुछ खास श्रेणियाँ उभरकर आती हैं। जैसे- तेज/धीमी गति से सीखने वाले, शारीरिक कारणों से सीखने में बाधा अनुभव करने वाले बच्चे, परिवेशीय व लैंगिक विविधता वाले बच्चे।  इनमें कुछ और श्रेणियाँ भी जुड़ सकती हैं। शिक्षक के रूप में इतनी विविधता से भरे बच्चों को हमें कक्षा के भीतर सीखने का समावेशी वातावरण देना होता है। समावेशी शिक्षा अर्थात् ऐसी शिक्षा जो सबके लिए हो। विद्यालय में विविधताओं से भरे सभी प्रकार के बच्चों को एक साथ एक कक्षा में शिक्षा देना ही समावेशी शिक्षा है। समावेशी शिक्षा से तात्पर्य है वह शिक्षा जिसमें किसी एक विशेष व्यक्ति श्रेणी पर निर्भर न होकर सभी को शामिल किया जाता है । "समावेशन शब्द का अपने-आप में कुछ खास अर्थ नहीं होता है। समावेशन के चारों ओर जो वैचारिक, दार्

सामुदायिक सहयोग हेतु कार्य-योजना निर्माण कैसे करें?

विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) के सदस्य विद्यालय और समुदाय के बीच प्रमुख सेतु हं भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रत्येक विद्यालय को एस०एम०सी0 सहयोग से सामुदायिक सहयोग की कार्य योजना विकसित करनी होगी। कार्य योजना के संभावित क्षेत्र निम्नवत हो सकते हैं। (अ) भौतिक संसाधन-चहारदिवारी, पंखा, फर्नीचर, स्टेशनरी, पेयजल, स्मार्ट बोर्ड, शैक्षिक तकनीकी से संबंधित उपकरण आदि। (ब) मानवीय संसाधन-सामुदायिक संसाधनों का कक्षा-कक्षीय एवं अन्य सहशैक्षिक क्रियाकलाप में उपयोग।  उक्त बिन्दुओं के परिप्रेक्ष्य में हमें अपनी संस्था उपलब्ध भौतिक / मानवीय संसाधनों की उपलब्धता की समीक्षा करने के बाद विद्यालय की आवश्यकताओं का चिह्नांकन करना होगा तदुपरान्त उन आवश्यकताओं का वर्गीकरण करते हुए सामुदायिक सहभागिता के प्रकार को स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हुए समुदाय से संपर्क स्थापित करना होगा।  इस प्रकार आवश्यकताओं के अनुसार संदर्भों/ स्रोतों की मदद लेते हुए कार्य योजना विकसित कर हम अपने कार्य को और बेहतर बना सकते हैं तथा समुदाय से बेहतर जुड़ाव स्थापित कर सकते हैं ।             सामुदायिक सहयोग की कार्य योज

शिक्षण योजना कैसे बनायें? देखें कक्षा शिक्षण हेतु कुछ शिक्षण योजनाएँ नमूने के रूप में

शिक्षण योजनाएं:-  हम सभी मानते हैं कि 'सीखने-सिखाने की प्रकिया और शिक्षण की सफलता शिक्षण योजनाओं पर निर्भर होती है।  इसलिए कक्षा शिक्षण हेतु कुछ शिक्षण योजनाएँ नमूने के रूप में जा रही हैं जो विभिन्न कक्षाओं और विषयों पर आधारित हैं। इन शिक्षण योजनाओं में लर्निंग आउटकम को केन्द्र बिन्दु (Focal Point) के रूप में लिया गया है।  पाठ्यकरम की भिन्न-भिन्न अताओं/ कौशलों के लिये अनेक गतिविधियों और अभ्यासों को भी शामिल किया गया हैं। साथ ही इनमें पाठ्यपुस्तक से संबंधित प्रकरणों और कार्यपुस्तिका के अभ्यासों को भी शामिल किया गया है।  शिक्षण योजना के विभिन्न चरणों हेतु अनुमानित समय का भी बँटवारा किया गया है । आपसे अपेक्षा है- सभी शिक्षक साथी इसी पैटर्न पर शिक्षण योजना बनाकर अपनी कक्षाओं में सीखने-सिखाने की गतिविधि संचालित करेंगे। इन शिक्षण योजनाओं में सुझायी गयी गतिविधियों के अलावा अन्य गतिविधियों को भी आवश्यकतानुसार शामिल कर उपयोग करेंगे। अपनी योजना के आधार पर उपयुक्त सामग्री और गतिविधियों की तैयारी करेंगे और कक्षा में एक बेहतर वातावरण बनाएंगे। चयनित लर्निंग आउटकम से संबंधित पाठ को दिवस/घंटों /खण